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राजगीर में 15 फरवरी को विश्वस्तरीय महाशिवरात्रि ध्यान उत्सव, आध्यात्मिक ऊर्जा का बनेगा वैश्विक केंद्र

February 14, 2026


प्राचीन इतिहास, आध्यात्मिक परंपरा और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध राजगीर एक बार फिर वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर विशेष पहचान बनाने जा रहा है 15 फरवरी को यहां विश्वस्तरीय महाशिवरात्रि ध्यान उत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश से हजारों शिवभक्त, ध्यान साधक और आध्यात्मिक जिज्ञासु भाग लेने वाले हैं।

यह भव्य कार्यक्रम विरायतन स्थित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मैदान में 6 बजे शाम से आयोजित होगा, पूरे क्षेत्र में अभी से उत्सव जैसा वातावरण देखने को मिल रहा है। गांव-गांव में प्रचार-प्रसार और आमंत्रण का दौर जारी है तथा लोगों में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। यह महाआयोजन ओशमिन फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित हो रहा है, जिसका नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त रहस्यवादी दार्शनिक एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक ओशमिन उर्फ राकेश चंद्रा कर रहे हैं। आयोजकों के अनुसार यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि चेतना जागरण और आंतरिक ऊर्जा को ऊपर उठाने का अवसर है,

जिसमें ध्यान, भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक अनुभव का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शिवसूत्र एवं विज्ञान भैरव तंत्र पर आधारित ध्यान सत्र, भक्ति और ध्यान संगीत प्रस्तुतियां, शिव तांडव, नृत्य प्रस्तुति, पूरी रात चलने वाला ध्यान, साधना क्रम एवं भव्य महाआरती होंगें। कार्यक्रम को यादगार बनाने के लिए देश-विदेश के कलाकार मंच पर अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इनमें प्रमुख रूप से अंतरराष्ट्रीय तबला वादक गिरीश विश्वा, सूफी गायक कपिल पुरोहित तथा अंतरराष्ट्रीय गिटार वादक गुड्डू मिश्रा सहित अनेक कलाकार और वाद्य समूह भाग लेंगे, जो पूरी रात वातावरण को भक्तिमय बनाए रखेंगे।

आयोजन को सफल और सुव्यवस्थित बनाने में फाउंडेशन की टीम लगातार कार्य कर रही है। अंतरराष्ट्रीय संयोजक विश्वजीत तिवारी के नेतृत्व में सोनू कुमार, निरमा कुमारी, शोभा देवी, प्रदीप कुमार, सुनील यादव, शत्रुघ्न कुमार, किरण कुमारी, शाबो देवी दीदी, रविंद्र कुमार, निर्भय कुमार, खूश्बू कुमारी, नेहा कुमारी एवं सैकड़ों स्वयंसेवक व्यवस्था, आगंतुकों की सुविधा, आवास, सुरक्षा और कार्यक्रम संचालन की तैयारियों में जुटे हुए हैं। इस कार्यक्रम को लेकर ओशमिन उर्फ राकेश चंद्रा ने बताया कि महाशिवरात्रि केवल पर्व नहीं, बल्कि चेतना जागरण का दिव्य क्षण है, साधना और ध्यान से व्यक्ति अपनी ऊर्जा को ऊर्ध्वगामी बना सकता है।

उन्होंने देश-विदेश के लोगों से अपील भी किया कि वे अधिक से अधिक संख्या में राजगीर पहुंचकर इस दिव्य आध्यात्मिक अनुभव का लाभ उठाएं। आयोजकों का मानना है कि यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टि से भी राजगीर तथा पूरे बिहार को नई पहचान दिलाएगा। आध्यात्मिक ऊर्जा, नृत्य-संगीत, ध्यान, भव्य महाआरती और भक्ति से भरपूर यह महाआयोजन निश्चित रूप से श्रद्धालुओं और साधकों के लिए जीवन भर याद रहने वाला अनुभव साबित होगा।

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मां सत्या हॉस्पिटल एंड एजुकेशन ट्रस्ट के द्वारा बौद्ध धम्म अभ्यास कार्यक्रम का आयोजन 15 दिवसीय राजगीर थाई मंदिर से शुरू किया गया

June 23, 2025


मां सत्या हॉस्पिटल एंड एजुकेशन ट्रस्ट के द्वारा बौद्ध धम्म अभ्यास  कार्यक्रम का आयोजन 15 दिवसीय राजगीर थाई मंदिर से शुरू किया गया है। वहीं सभी बाल बौद्ध भिक्षुओं को बंगाल बुद्धिस्ट एसोसिएशन के प्रबंधक निर्भय कुमार सिंह के नेतृत्व में मंदिर में पुरे बौद्ध परंपरा के अनुसार स्वागत एवं स्वल्पाहार कराया गया।इस अवसर पर कार्यक्रम प्रमुख एवं सेक्रेटरी रूपेश भंते ने बताया की राजगीर थाई मंदिर से बौद्ध धम्म अभ्यास  कार्यक्रम का आयोजन 15 दिवसीय किया गया है।

और यह  बाल भिक्षुओं को भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा।एवं इनके इतिहास से रूबरू कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि राजगीर, नालंदा ,बोधगया ,वैशाली, कुशीनगर, लुंबिनी नेपाल, सारनाथ वाराणसी यह लोग जाएंगे। उन्होंने बताया कि बौद्ध धम्म अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दुखों से मुक्ति प्राप्त करना और निर्वाण प्राप्त करना है। इसके अलावा, यह अभ्यास मन को शांत करने, जागरूकता बढ़ाने, और नैतिक आचरण को विकसित करने में भी मदद करता है।

राजगीर, बिहार जैसे बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण स्थलों पर धम्म अभ्यास का आयोजन, बौद्धों के लिए आध्यात्मिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि बौद्ध धम्म अभ्यास का आयोजन, बुद्ध की शिक्षाओं के अनुसार, आध्यात्मिक विकास और शांति प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इसमें ध्यान, शील, और प्रज्ञा का अभ्यास शामिल है। राजगीर, बिहार, बौद्ध धर्म के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है।और यहां बौद्ध भिक्षु और उपासक धम्म का अभ्यास करते हैं।

उन्होंने बताया कि ध्यान और शील के अभ्यास से मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है।बौद्ध धम्म के अनुसार, दुखों का कारण अज्ञान है।और प्रज्ञा के विकास से दुखों से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है।बौद्ध धम्म के अभ्यास से व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से विकसित होता है और आत्मज्ञान की ओर बढ़ता है। उन्होंने बताया कि धम्म का अर्थ है बनाए रखना  और इसलिए यह बौद्ध विश्वास का केंद्र है क्योंकि यह धर्म को 'बनाए रखता है और बौद्ध यह भी मान सकते हैं कि यह ब्रह्मांड के प्राकृतिक क्रम को बनाए रखता है।

धम्म बुद्ध के कार्यों और शिक्षाओं पर आधारित है।जिसका पालन करने के लिए बौद्धों को प्रोत्साहित किया जाता है।इस अवसर भारत के कई राज्यों के साथ थाईलैंड के भी बौद्ध भिक्षु शामिल थे। सभी बल बौद्ध भिक्षुओं ने भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों पर जाकर पुरे बौद्ध परंपराओं के अनुसार पूजा अर्चना किया।

मां सत्या हॉस्पिटल एंड एजुकेशन ट्रस्ट के द्वारा बौद्ध धम्म अभ्यास कार्यक्रम का आयोजन 15 दिवसीय राजगीर थाई मंदिर से शुरू किया गया मां सत्या हॉस्पिटल एंड एजुकेशन ट्रस्ट के द्वारा बौद्ध धम्म अभ्यास  कार्यक्रम का आयोजन 15 दिवसीय राजगीर थाई मंदिर से शुरू किया गया Reviewed by News Bihar Tak on June 23, 2025 Rating: 5

तीन दिवसीय राजगीर में श्री गुरु नानक देव जी महाराज का 555 वां प्रकाश पर्व का हुआ समापन,सुमित कलसी ने कहा : भारत की पावन भूमि पर कई संत-महात्मा अवतरित हुए हैं

November 24, 2023




पर्यटन स्थल राजगीर में आयोजित श्री गुरु नानक देव जी महाराज का 555 वां प्रकाश पर्व के अंतिम दिन  गुरु नानक शीतल कुंड प्रांगण गुरु का भजन नानक आया , नानक आया मंगल गाओ मंगल गाओ 555 वां गुरुनानक देव जी के नाल भजन से राजगीर पंच पहाडियां गुंज उठी।वहीं पंजाब ,हरियाणा ,दिल्ली , मुंबई , पुणे , कोलकाता ,चेन्नई ,हरियाणा ,राजस्थान , अमृतसर , जयपुर ,आगरा ,झारखंड ,छत्तीसगढ , सहीत अन्य राज्यों से भारी संख्या में सिख श्रद्धालु शामिल हुए।सीख श्रद्धालु दरबार में माथा टेका और लंगर में प्रसाद ग्रहण किया।



इस अवसर पर प्रबंधक सुमित कलसी ने कहा कि  भारत की पावन भूमि पर कई संत-महात्मा अवतरित हुए हैं, जिन्होंने धर्म से विमुख सामान्य मनुष्य में अध्यात्म की चेतना जागृत कर उसका नाता ईश्वरीय मार्ग से जोड़ा है। ऐसे ही एक अलौकिक अवतार गुरु नानकदेव जी हैं।

ऊंच-नीच का विरोध करते हुए गुरु नानकदेव अपनी मुखवाणी 'जपुजी साहिब' में कहते हैं कि 'नानक उत्तम-नीच न कोई' जिसका भावार्थ है कि ईश्वर की निगाह में छोटा-बड़ा कोई नहीं फिर भी अगर कोई व्यक्ति अपने आपको उस प्रभु की निगाह में छोटा समझे तो ईश्वर उस व्यक्ति के हर समय साथ है।

यह तभी हो सकता है जब व्यक्ति ईश्वर के नाम द्वारा अपना अहंकार दूर कर लेता है। तब व्यक्ति ईश्वर की निगाह में सबसे बड़ा है और उसके समान कोई नहीं।उन्होंने कहा कि समाज में समानता का नारा देने के लिए नानक देव ने कहा कि ईश्वर हमारा पिता है और हम सब उसके बच्चे हैं और पिता की निगाह में छोटा-बड़ा कोई नहीं होता।

वही हमें पैदा करता है और हमारे पेट भरने के लिए खाना भेजता है। इस अवसर पर  मुख्य कथा वाचक भाई सुखदेव सिंह ने कहा की गुरु नानकदेवजी के बताए रास्ते पर चलने के लिए  नानकदेवजी ने अपना पूरा जीवन समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने में समर्पित कर दिया।भगवान एक है।एक ही गुरु है और कोई नहीं। जहां गुरु जाते हैं, वह स्थान पवित्र हो जाता है।

उन्होंने कहा कि यह श्री गुरु नानक देव जी महाराज का 555 वां में प्रकाश पर्व का आयोजन किया गया जो राजगीर के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी ने दुनिया को 'नाम जपो, किरत करो, वंड छको' का संदेश देकर समाज में भाईचारक सांझ को मजबूत किया और एक नए युग की शुरुआत की।

सामाजिक कुरीतियों का विरोध करके उन्होंने समाज को नई सोच और दिशा दी। गुरु जी ने ही समाज में व्याप्त ऊंच-नीच की बुराई को खत्म करने और भाईचारक सांझ के प्रतीक के रूप में सबसे पहले लंगर की शुरुआत की।इस अवसर पर बाबा बेअंत सिंह गुरु जी की बाणी और उनकी शिक्षाओं से संगत को निहाल किया जाता है। गुरु नानक नाम लेवा संगत उन्हें बाबा नानक और नानकशाह फकीर भी कहती है।गुरु नानक देव जी ने अपना पूरा जीवन मानवता की सेवा में लगा दिया। उन्होंने सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि अफगानिस्तान, ईरान और अरब देशों में भी जाकर लोगों को पाखंडवाद से दूर रहने की शिक्षा दी। गुरु जी के जन्मदिवस को गुरु पर्व या प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है।

श्री ननकाणा साहिब में प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब भी है।इसका निर्णाण महाराजा रणजीत सिंह ने करवाया था।उन्होंने कहा कि सिखों के पहले गुरु नानकदेवजी की जयंती देशभर में प्रकाश पर्व के रूप में मनाई जाती है। प्रकाश पर्व यानी मन की बुराइयों को दूर कर उसे सत्य,ईमानदारी और सेवाभाव से प्रकाशित करना।इस अवसर पर बाबा सुखदेव सिंह ने कहा कि गुरु की महिमा का व्याख्यान करते हुए कहा की गुरु नानक देव केवल सिख धर्म के संस्थापक ही नहीं, बल्कि मानव धर्म के उत्थापक हैं. वे केवल सिखों के आदि गुरु नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के गुरु हैं,वे भारत की वैभवशाली और विश्व-बन्धुत्व की समृद्ध परंपरा के अद्वितीय प्रतीक हैं. उनके व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्मसुधारक, समाजसुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबंधुत्व आदि समस्त गुणों के दर्शन हो जाते हैं।

उनकी शिक्षाएं और विचार सदैव मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करती है।उन्होंने कहा कि  बचपन से प्रखर बुद्धि के धनी गुरुनानक देव वैसे विकट समय में जन्म लिये थे, जब भारत में कोई केंद्रीय संगठित शक्ति नहीं थी. विदेशी आक्रमणकारी देश को लूटने में लगे थे,धर्म के नाम पर अंधविश्वास और कर्मकांड चारों तरफ फैला हुआ था,उस समय गुरु नानक देव ने अपने विचारों और दर्शन से समाज को सही मार्ग दिखा कर एकसूत्र में पिरोया था, उन्होंने अपनी सुमधुर सरल वाणी से जनमानस के हृदय को जीत लिया था,लोगों को सरल भाषा में केवल गुरुवाणी का संदेश ही नहीं बल्कि विश्व बंधुत्व का पैगाम भी उन्होंने दिया,नानक देव जी ने कहा था कि ईश्वर सबके पिता हैं,

फिर एक पिता की संतान होने के बावजूद हम ऊंच-नीच कैसे हो सकते हैं,इन्हीं सभी भ्रांतियों को दूर करने के लिए उन्होंने उपदेशों को अपने जीवन में अमल किया और चारों ओर धर्म का प्रचार कर स्वयं एक आदर्श बने,उन्होंने सामाजिक सद्भाव की मिसाल कायम की,उनहोंने कहा कि गुरुनानक देव जी ने ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाने के लिए लंगर की परंपरा शुरू की थी,लंगर में छूत- अछूत सभी जाति - वर्ग के लोग एक साथ बैठकर लंगर छकते हैं, उसी परंपरा के तहत सभी गुरुद्वारों में लंगर की व्यवस्था होती है,लंगर में बिना भेदभाव संगत सेवा होती है,

उनहोंने कहा कि गुरु नानक देव ने भारत के अलावे कई देशों की यात्राएं कर धार्मिक एकता के उपदेशों और शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार कर दुनिया को जीवन का नया मार्ग बताया। पांच सौ पचास वर्ष पूर्व दिए उनके उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं. उनका संदेश देश-दुनिया में मानवता को आलोकित कर रहा है।इस अवसर प्रबंधक सुमित कलसी, ग्रंथि मनजीत सिंह,

प्रबंधक प्रभाष साह,गुरुनानक मिशनरी सेंटर राजगीर के सचिव त्रिलोक सिंह निषाद,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार जगजोत सिंह,उपाध्यक्ष लखविंदर सिंह,उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह,महासचिव सरदार इंद्रजीत सिंह,सचिव सरदार हरबंस सिंह,सदस्य सरदार राजा सिंह,पूर्व महासचिव सदस्य सरदार महेंद्र पाल सिंह ढिल्लों,भाई गुरविंदर सिंह,भाई राम अवतार सिंह,सरदार बंटी सिंह,छोटे सिंह,लखविंदर सिंह,शुखविन्द् सिंह,खुशविंदर सिंह,राजन सिंह,चरणजीत सिंह, अमनदीप सिंह,अमुजेश कुमार,बृजेश सिंह,संजय सिंह,नीतिश सिंह इंद्रजीत सिंह, लखविंदर सिंह सुखवीर सिंह,हरजीत सिंह जी ,सुरजीत सिंह, परपाल सिंह जहौल,जसवीर सिंह ,मत्तेवाल, जत्थेदार भूपेन्द्र सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे


तीन दिवसीय राजगीर में श्री गुरु नानक देव जी महाराज का 555 वां प्रकाश पर्व का हुआ समापन,सुमित कलसी ने कहा : भारत की पावन भूमि पर कई संत-महात्मा अवतरित हुए हैं तीन दिवसीय राजगीर में श्री गुरु नानक देव जी महाराज का 555 वां प्रकाश पर्व का हुआ समापन,सुमित कलसी ने कहा : भारत की पावन भूमि पर कई संत-महात्मा अवतरित हुए हैं Reviewed by News Bihar Tak on November 24, 2023 Rating: 5

लोक आस्था का चार दिवसीय महा छठ पर्व विभिन्न घाट तालाबों में उदयमान भास्कर को अर्ध्य के साथ ही शांतिपूर्ण हुआ संपन्न

November 20, 2023


चार दिवसीय लोक आस्था के महापर्व छठ के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य भगवान को अर्घ्य देने के बाद सोमवार को उगते हुए सूर्य को छठव्रतियों ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया।छठ के लिए 36 घंटे के कठिन उपवास खोला। उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।

सुबह ठंड में भी छठव्रतधारियों का उत्साह देखते ही बना। व्रत रखने वालों ने अपने परिवार के साथ पवित्र जल में खड़े होकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया।छठ व्रत माताओं ने राजगीर के सूर्य कुंड बैतरणी घाट,हसनपुर तलाव, झुनकियां बाबा मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों पर लोगों ने छठ पूजा मे धार्मिक वातावरण का  लाभ लिया। वहीं प्रशासन की ओर से सभी घाटों पर छठ व्रती  की सेवा के लिए पुलिस बल की तैनाती गई थी।ताकि छठ व्रत माताओं को किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो।

वहीं छठ व्रतियों के लिए टमटम चालक यूनियन के द्वारा राजगीर में चलने वाले टमटम और ई- रिक्शा चालकों ने निशुल्क सेवा भाव से घाटों तक पहुंचाने एवं लाने के लिए तत्पर रहे।वहीं टमटम चालक यूनियन के द्वारा छठ व्रतियों के बीच फल एवं शरवत वितरण किया गया।इस अवसर पर टमटम चालक यूनियन के अध्यक्ष अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह ने बताया कि यूनियन के सभी सदस्य आज एकजुट होकर छठ व्रतियों की सेवा में जुटे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि यूनियन के द्वारा छट व्रतियों के बीच फल और शरवत वितरण किया गया है।उन्होंने कहा कि यूनियन द्वारा राजगीर में चलने वाले टमटम और ई- रिक्शा चालकों ने निशुल्क सेवा भाव से घाटों तक पहुंचाने एवं लाने में बिल्कुल निशुल्क सेवा भाव में जूटे रहे।

लोक आस्था का चार दिवसीय महा छठ पर्व विभिन्न घाट तालाबों में उदयमान भास्कर को अर्ध्य के साथ ही शांतिपूर्ण हुआ संपन्न लोक आस्था का चार दिवसीय महा छठ पर्व विभिन्न घाट तालाबों में उदयमान भास्कर को अर्ध्य के साथ ही शांतिपूर्ण हुआ संपन्न Reviewed by News Bihar Tak on November 20, 2023 Rating: 5

राजगीर में भूटानी मंदिर की ऊंची चोटी पर बने स्वर्ण शिखर का उद्घाटन किया गया,कार्यक्रम में भूटान सरकार के कई अधिकारी रहे उपस्थित

November 17, 2023


भारत और भुटान के राजनयिक संबंधों को 50 साल पूरा होने पर बिहार सरकार के सहयोग से भुटान सरकार के द्वारा राजगीर में पहला भूटानी मंदिर का निर्माण कार्य कराया जा रहा है।वहीं भूटान सरकार के द्वारा मंदिर के सबसे ऊंची चोटी पर बनाए गए बौद्ध धर्म के अनुसार स्वर्ण शिखर बनाया गया है।

जिसको पूरे बौद्ध परंपराओं के अनुसार उद्घाटन किया गया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भूटान के कोलकाता दूतावास कंसलटेंट जनरल तसी पिंजोर शामिल हुए।साथ ही भूटान के कई वरीय अधिकारी भी शामिल हुए।इस अवसर पर रॉयल भूटान बौद्ध मंदिर बोधगया के चीफ लामा उगेन पिंजोर के नेतृत्व में बौद्ध भिक्षुओं भूटान क संस्कृति और परंपराओं के बिच पुजा अर्चना किया।घंटो मंत्रोच्चारण के बीच भगवान बुद्ध को नमन किया गया है। उसके बाद पूरे बौद्ध परंपराओं के अनुसार उद्घाटन किया गया।वहीं मंदिर को देखने के लिए बहुत जल्द ही भूटान के प्रधानमंत्री और वहां के राजा भी जल्द राजगीर आएंगे।

इस अवसर पर भूटान के कोलकाता दूतावास कंसलटेंट जनरल तसी पिंजोर ने कहा भूटान सरकार के द्वारा यह मंदिर का निर्माण कार्य बहुत तेजी गति से पूरा किया जा रहा है।और यह मंदिर बहुत जल्द ही पूर्ण रूप से बनकर तैयार हो जाएगा।उन्होंने कहा कि भारत और भुटटान के राजनयिक संबंधों को 50 साल पूरा होने पर बिहार सरकार के सहयोग से भुटान सरकार राजगीर में पहला भूटानी मंदिर का निर्माण कार्य कराया जा रहा है।और आज मंदिर के सबसे ऊंची चोटी पर बनाए गए बौद्ध धर्म के अनुसार स्वर्ण शिखर ( सरटोग) बनाया गया है।जिसको पूरे बौद्ध परंपराओं के अनुसार उद्घाटन किया गया। उन्होंने कहा की भगवान बुद्ध के संदेशों को अपनाकर आज भूटान देश चल रहा है।

उन्होंने कहा कि बुद्ध दर्शन के मुख्‍य तत्व चार आर्य सत्य,आष्टांगिक मार्ग, प्रतीत्यसमुत्पाद, अव्याकृत प्रश्नों पर बुद्ध का मौन,बुद्ध कथाएँ, अनात्मवाद और निर्वाण बुद्ध ने अपने उपदेश पालि भाषा में दिए, जो त्रिपिटकों में संकलित हैं। त्रिपिटकों का एक भाग है धम्मपद।प्रत्येक व्यक्ति को तथागत बुद्ध के बारे में जानना चाहिए।जीवन में हजारों लड़ाइयां जीतने से अच्छा है कि तुम स्वयं पर विजय प्राप्त कर लो। फिर जीत हमेशा तुम्हारी होगी, इसे तुमसे कोई नहीं छीन सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी हालात में तीन चीजें कभी भी छुपी नहीं रह सकती, वो है। सूर्य, चन्द्रमा और सत्य।जीवन में किसी उद्देश्य या लक्ष्य तक पहुंचने से ज्यादा महत्वपूर्ण उस यात्रा को अच्छे से संपन्न करना होता है।

बुराई से बुराई कभी खत्म नहीं होती। घृणा को तो केवल प्रेम द्वारा ही समाप्त किया जा सकता है।यह एक अटूट सत्य है।सत्य के मार्ग पर चलते हुए व्यक्ति केवल दो ही गलतियां कर सकता है,


पहली या तो पूरा रास्ता न तय करना, दूसरी या फिर शुरुआत ही न करना।जिस तरह एक जलते हुए दीये से हजारों दीपक रोशन किए जा सकते है, फिर भी उस दीये की रोशनी कम नहीं होती, उसी तरह खुशियां बांटने से हमेशा बढ़ती है, कभी कम नहीं होती। उन्होंने कहा जीवन में आप चाहें जितनी अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ लो, कितने भी अच्छे शब्द सुनो, लेकिन जब तक आप उनको अपने जीवन में नहीं अपनाते तब तक उसका कोई फायदा नहीं होगा।हमेशा क्रोधित रहना, जलते हुए कोयले को किसी दूसरे व्यक्ति पर फेंकने की इच्छा से पकड़ रखने के समान है।

यह क्रोध सबसे पहले आपको ही जलाता है।क्रोध में हजारों शब्दों को गलत बोलने से अच्छा, मौन वह एक शब्द है जो जीवन में शांति लाता है। इस अवसर पर चीफ लामा उगेन पिंजोर ने कहा कि जिन्हें मनुष्य ने अपने अज्ञान, ग़लत ज्ञान या मिथ्या दृष्टियों से पैदा कर लिया हैं उन दुखों का निराकरण सही ज्ञान द्वारा ही किया जा सकता है।गौतम बुद्ध स्वयं कहीं प्रतिबद्ध नहीं हुए और न ही अपने शिष्यों को उन्होंने कहीं बांधा। उन्होंने कहा है कि मेरी बात को इसलिए चुपचाप न मानो उसे मैंने यानी बुद्ध ने कहा है। उस पर भी सन्देह करो और विविध परीक्षाओं द्वारा उसकी परीक्षा करो।

जीवन की कसौटी पर उन्हें परखो, अपने अनुभवों से मिलान करो, यदि तुम्हें सही जान पड़े तो स्वीकार करो, अन्यथा छोड़ दो। यही कारण था कि बौद्ध धर्म इस धर्म के मानने वाले अनुयाइयों को रहस्य से मुक्त, मानवीय संवेदनाओं को सीधे स्पर्श करता था।उन्होंने कहा भगवान बुद्ध ने लोगों को मध्यम मार्ग का उपदेश दिया। उन्होंने दुःख, उसके कारण और निवारण के लिए अष्टांगिक मार्ग सुझाया। उन्होंने अहिंसा पर बहुत जोर दिया है। उन्होंने कहा कि जीवन में पूर्णता प्राप्त करना। निर्वाण प्राप्त करना। तृष्णा का त्याग करना। यह मानना कि सभी संस्कार अनित्य है। कर्म को मानव के नैतिक संस्थान का आधार मानना गौतम बुद्ध के अनुसार धम्म है।परा-प्रकृति में विश्वास करना।आत्मा में विश्वास करना कल्पना- आधारित विश्वास मानना। धर्म की पुस्तकों का वाचन करना बुद्ध के अनुसार अ धम्म माना यही गौतम बुद्ध के अनुसार अ धम्म है।जो धम्म प्रज्ञा की वृद्धि करे। जो धम्म सबके लिए ज्ञान के द्वार खोल दे। जो धम्म यह बताए कि केवल विद्वान होना पर्याप्त नहीं है।जो धम्म यह बताए कि आवश्यकता प्रज्ञा प्राप्त करना है।

यही बुद्ध के अनुसार सद्धम्म है।इस अवसर पर मुखू बौद्ध भिक्षु कर्मा दोरजी ने कहा कि एक साल के अंदर यह यह मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा।आज पूरे बौद्ध परंपराओं के अनुसार यह कार्यक्रम संपन्न कराया गया है।उन्होंने कहा कि यह मंदिर को देखने के लिए जल्द ही भूटान के प्रधानमंत्री एवं वहां के राजा भी आएंगे।यह मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भूटान से काफी संख्या में बौद्ध धर्मावलंबी प्रतिदिन काफी संख्या यहां पहुंचेंगे।इस अवसर पर प्रोजेक्ट डायरेक्टर किनले ग्येलट्शेन ने कहा कि भारत और भूटान के साझा सांस्कृतिक मूल्यों की एक भौतिक अभिव्यक्ति है।जो इन दोनों देशों को बांधे हुए है।

उन्होंने बताया कि इस मंदिर का शिलान्यास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 11 नवंबर 2018 को किया था। कहा कि इस मंदिर में बैठकर काफी संख्या में बैठकर बौद्ध भिक्षु पुजा अर्चना करेंगे। उन्होंने बताया कि इस मंदिर की ऊंचाई 70 फीट होगी। उन्होंने कहा यहां बौद्ध बौद्ध भिक्षुओं के रहने के लिए भी भवन का भी निर्माण कार्य तेजी गति से पुरा किया जा रहा है।

राजगीर में भूटानी मंदिर की ऊंची चोटी पर बने स्वर्ण शिखर का उद्घाटन किया गया,कार्यक्रम में भूटान सरकार के कई अधिकारी रहे उपस्थित राजगीर में भूटानी मंदिर की ऊंची चोटी पर बने स्वर्ण शिखर का उद्घाटन किया गया,कार्यक्रम में भूटान सरकार के कई अधिकारी रहे उपस्थित Reviewed by News Bihar Tak on November 17, 2023 Rating: 5

शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन के द्वारा शिव गुरू संगोष्ठी का हुआ आयोजन,मुख्य वक्ता दीदी बरखा आनन्द ने कहा : शिव केवल नाम के नहीं अपितु काम के गुरू हैं

May 06, 2023


शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन के द्वारा राजगीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में शिव गुरू संगोष्ठी आयोजित किया गया।जिसमें नालंदा, नवादा और  सेखपुरा सहित अन्य जिलों के लगभग एक हजार से अधिक लोग शामिल हुए।इस अवसर पर पूरे परंपरागत तरीके से भगवान शिव की पूजा अर्चना भी की गई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मुख्य वक्ता दीदी बरखा आनन्द ने कहा कि शिव केवल नाम के नहीं अपितु काम के गुरू हैं।शिव के औढरदानी स्वरूप से धन,धान्य, संतान, सम्पदा आदि प्राप्त करने का व्यापक प्रचलन है तो उनके गुरू स्वरूप से ज्ञान भी क्यों नहीं प्राप्त किया जाय। उन्होंने कहा कि किसी संपत्ति या संपदा का उपयोग ज्ञान के अभाव में घातक हो सकता है।शिव जगतगुरू हैं।अतएव जगत का एक-एक व्यक्ति चाहे वह किसी धर्म,जाति, संप्रदाय,लिंग का हो शिव को अपना गुरू बना सकता है।

शिव का शिष्य होने के लिए किसी पारम्परिक औपचारिकता अथवा दीक्षा की आवश्यकता नहीं है।केवल यह विचार कि शिव मेरे गुरू हैं।शिव की शिष्यता की स्वमेव शुरूआत करता है।इसी विचार का स्थायी होना हमको आपको शिव का शिष्य बनाता है। इस अवसर पर भैया अर्चित आनन्द ने कहा कि यह अवधारणा पूर्णतःआध्यात्मिक है, जो भगवान शिव के गुरु स्वरूप से एक एक व्यक्ति के जुड़ाव से संबंधित है।उन्होंने कहा कि शिव के शिष्य एवं शिष्याएँ अपने सभी आयोजन शिव गुरू हैं।और संसार का एक-एक व्यक्ति उनका शिष्य हो सकता है।इसी प्रयोजन से करते हैं। शिव गुरू हैं।यह कथ्य बहुत पुराना है।भारत भूखंड के अधिकांश लोग इस बात को जानते हैं।कि भगवान शिव गुरू हैं,आदिगुरू इस अवसर सुरेश प्रसाद सिंह, सुधीर कुमार ,नवीन कुमार, कमलेश सिंह,शिवकुमार विश्वकर्मा, सोमेंद्र कुमार झा, प्रेमिका देवी, गौतम कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे।


शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन के द्वारा शिव गुरू संगोष्ठी का हुआ आयोजन,मुख्य वक्ता दीदी बरखा आनन्द ने कहा : शिव केवल नाम के नहीं अपितु काम के गुरू हैं शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन के द्वारा शिव गुरू संगोष्ठी का हुआ आयोजन,मुख्य वक्ता दीदी बरखा आनन्द ने कहा : शिव केवल नाम के नहीं अपितु काम के गुरू हैं Reviewed by News Bihar Tak on May 06, 2023 Rating: 5

राजगीर में 20 वें तीर्थंकर भगवान श्री मुनीसुव्रत स्वामी जी का तीन दिवसीय केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव हुआ शुरू,कई राज्यों से काफी संख्या में पहुंचे जैन श्रद्धालु

February 17, 2023


श्री जैन श्वेतांबर कोठी राजगीर स्थित नौलखा मंदिर में 20 वें तीर्थंकर भगवान श्री मुनीसुव्रत स्वामी जी का तीन दिवसीय केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव का भव्य शुरुआत हो गया है।

जिसमें देश के महाराष्ट्र गुजरात, पटना, झारखंड ,दिल्ली, राजस्थान,मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से जैन श्रद्धालु जैन श्रद्धालु पहुंचे हैं।इस अवसर पर पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।आज केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव की शुरुआत तीर्थंकर भगवान श्री मुनीसुव्रत स्वामी की अर्हत महा अभिषेक से पूजा की गई।जिसमें 24 प्रकार के द्रव्य से प्रभु का अभिषेक किया गया।एवं मन्दिर जी में अठारह पाप स्थानक पूजा का आयोजन धूमधाम से किया गया और पूरे मन्दिर परिसर को फुलों से सजाया गया है तथा भगवान की सुन्दर ऑगी भी की गई।भगवान श्री मुनीसुव्रत स्वामी जी की जयकारों से पूरा मंदिर गूंज उठा।

इस अवसर पर मुनि दादा कल्याणक मंडल मुंबई के कोमल भाई मेहता ने कहा यहाँ के कण कण में प्रभु ने विचरण किया है।ऐसी पवित्र भूमि की यात्रा भाग्यशालियों को ही मिलती है।हम अपने को धन्य समझते हैं कि हमें कल्याणक भूमि में उपस्थित होकर प्रभु की आराधना करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि राजगीर एक अति पवन कल्याण तीर्थ भूमि है। हम सबों को इन प्राचीन कल्याणक भूमि की यात्रा जीवन में अवश्य करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि राजगीर हमें अपना घर जैसा लगता है यहां आकर हमें अत्यंत ही धार्मिक वातावरण का अनुभव होता है यहां कन कन में प्रभु विराजमान है ऐसा प्रतीत होता है।उन्होने कहा की जैन धर्म के अनुसार वत्थु सहावो धम्मो अर्थात् वस्तु का स्वभाव ही धर्म है।प्रत्येक वस्तु का कोई न कोई स्वभाव होता है।जैसे अग्नि का स्वभाव उष्णता है और जल का स्वभाव शीतलता है।प्रत्येक वस्तु अपने मूल स्वभाव को कभी नहीं छोड़ती है।अन्य वस्तु का संयोग पाकर स्वभाव में परिवर्तन हो जाता है।जब यह संयोग नहीं रहता है तो वह वस्तु अपने मूल स्वभाव में लौट आती है।जैसे पानी का स्वभाव शीतल है।यदि इसे अग्नि का संयोग प्राप्त हो जावे तो इसके स्वभाव में परिवर्तन हो जाता है।

अर्थात् गर्म हो जाता है और जब संयोग समाप्त हो जाता है,तो पानी अपने मूल स्वभाव शीतलता में लौट आता है।इसी प्रकार आत्मा का स्वभाव ज्ञाता-दृष्टा है व मूल में शुद्ध है, मगर कर्मों के संयोग से यह अशुद्ध होकर संसार में भ्रमण कर रही है।जब कर्मों का संयोग समाप्त हो जावेगा तो यह आत्मा अपने मूल स्वभाव अर्थात् शुद्धता को प्राप्त कर लेगी और सिद्धालय में विराजमान हो जावेगी।उन्होने कहा की चारित्र को भी धर्म कहा गया है। चारित्र को निश्चय से धर्म कहा है क्योंकि चारित्र धारण किये बिना आत्मा से बद्ध पुद्गल कर्मों की निर्जरा सम्भव नहीं है।

चारित्र भाव से क्रियात्मक होना चाहिए अर्थात् शुद्ध भाव पूर्वक आचरण में महाव्रत रूप लेना आवश्यक है। इस अवसर पर संस्था के मंत्री रंजन कुमार जैन ने कहा कि तीर्थकर परमात्मा के चरण जहाँ पड़े ऐसी पवित्र नगरी राजगीर तीर्थ में आये हुये तीर्थयात्रियों का स्वागत कर हम काफी आनन्दित महसुस करते हैं यह हमारे लिये सौभाग्य की बात है।भगवान के चार कल्याणक च्यवन, जन्म, दीक्षा एवं केवलज्ञान इसी पवित्र भूमि पर हुये हैं। इस अवसर पर संस्था के ट्रस्टी राजकुमार जैन ने कहा कि कल्याणक पूजा के माध्यम से समस्त समाज में एक अच्छा संदेश जाता है।सभी श्रद्धालु सौभाग्यशाली है कि जिन्हें इस आयोजन में सम्मिलित होने का मौका मिला है।

इस अवसर पर संस्था के सहायक प्रबंधक ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि कल्याणक पूजा का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है इससे हम सबों में एक नई उर्जा का संचालन होता है। भगवान की आराधना करने से हमें काफी सुकुन मिलता है। इस अवसर पर संस्था के कैशियर संजीव कुमार जैन ने कहा कि नौलखा मन्दिर का निर्माण राजस्थान के कुशल कारीगरों को द्वारा किया गया है।इसका निर्माण सन 1954 में प्रारंभ किया गया था इस मन्दिर जी में प्रभु की प्रतिष्ठा सन 1961 में हुई है।भगवान श्री मुनिसुब्रत स्वामी भगवान श्री राम के समकालीन थे।प्रतिवर्ष लाखों तीर्थयात्री इस तीर्थ की यात्रा करने पधारते हैं। इस मन्दिर जी की विशेषता है कि इसमें कहीं भी लोहे का इस्तेमाल नहीं किया गया है।इस अवसर पर सुप्रसिद्ध संगीतकार निपुन मेहता ने अपने भजनों के कार्यक्रमों से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

उन्होंने एक से बढ़कर एक अपनी मखमली आवाज उसे भजनों की प्रस्तुति दी।इस अवसर पर समीर मेहता,जिमी मेहता,राजु भाई,परेश संघवी, दीपेश मोरखीया,हनीष संघवी, संजीव कुमार जैन, विजय भाई, रमेश भूरा,नीलेश मोरखिया,निपुन मेहता,सुशील कुमार जैन,मधु बेन,डौली जैन, अर्चना जैन, अनीता बोथरा, प्रेमलता बेन, पुनम बेन,प्रिया बेन,वैशाली बेन,गीता बेन,सुखराज जैन, मोनू सुचन्ती,सत्येन्द्र कुमार,रेखा जैन,कंचन जैन,सुषमा पाण्डेय,रूपा जैन,परी जैन सहित अन्य लोग उपस्थित थे।











 

राजगीर में 20 वें तीर्थंकर भगवान श्री मुनीसुव्रत स्वामी जी का तीन दिवसीय केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव हुआ शुरू,कई राज्यों से काफी संख्या में पहुंचे जैन श्रद्धालु राजगीर में 20 वें तीर्थंकर भगवान श्री मुनीसुव्रत स्वामी जी का तीन दिवसीय केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव हुआ शुरू,कई राज्यों से काफी संख्या में पहुंचे जैन श्रद्धालु Reviewed by News Bihar Tak on February 17, 2023 Rating: 5

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